जल है तो कल है पर निबंध
जल है तो कल है
100 words
आज अगर जल नहीं मिलेगा
प्रश्नों का हल नहीं मिलेगा।
आज अगर जी भी लोगे तो
जीने को कल नहीं मिलेगा।
सचमुच जल-संकट सीधे जीवन पर संकट है। हमारी सारी मानव-सभ्यता जल-स्रोतों के किनारे बसी है। जीवन वहीं-वहीं बसा, जहाँ जल के भंडार थे। इसलिए सभी तीर्थ और महानगर नदियों के तटों पर बने। आज दुर्माण सें के स्रोत प्रदूषित हो गए हैं। जल प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण है-जनसंख्या का बढ़ता दबाव और हमारी गैर-जिम्म जनसंख्या बढ़ने के साथ-साथ हमारी आवश्यकता बढ़ती चली गई। हमने आधुनिक संसाधनों के निर्माण के लिए खतरनाक रसायनों का खुलकर उपयोग किया। हमने अपने व्यावसायिक लाभ के लिए जानबूझकर प्रकृति के साथ खिलवाड़ किया। को पेड़ काट डाले. पहाड़ समतल कर दिए, तो कभी खतरनाक रासायनिक कचरा पवित्र नदियों में उड़ेल दिया। परिणाम यह हा कि पवित्र पावनी यमुना दिल्ली तक आते-आते काली हो गई। सरकार और समाज ने नदियों को देवी तो कहा किंतु उसको स्वच्छता की ओर ध्यान नहीं दिया। उन्हें पवित्र रखने के कठोर उपाय नहीं किए गए। हमने लाखों-लाखों तालाब भर डलें। सो. पशु प्यासे मरने लगे। धरती का जल-स्तर घट गया और हम जल के संकट में फैस गए। यदि हमें जल-संकट से निस्ता पाना है तो हमें जागरूक होना होगा, कठोर उपाय अपनाने होंगे। प्रकृति के शोषण को बजाय उसकी गोद में बैठकर संरक्षण पाना होगा। वर्षा जल को पुनः तालाबों, सरोवरों और जलागारों में संगृहीत करना होगा।
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